उत्तराखंड

सोमवार को नव निर्मित छतरी तथा शीर्ष कलश को विधिवत स्थापित किया जायेगा

रूद्रप्रयाग/ देहरादून। श्री बदरीनाथ- केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) अध्यक्ष अजेंद्र अजय के अथक प्रयासों से मंदिरों के जीर्णोद्धार, सौंदर्यीकरण व विस्तारीकरण के कार्य सतत चल रहे हैं। कुछ माह पूर्व तृतीय केदार श्री तुंगनाथ मंदिर की छतरी के जीर्णोद्धार के बाद अब अति प्राचीन श्री विश्वनाथ मंदिर गुप्तकाशी की जीर्ण- शीर्ण छतरी के जीर्णोद्धार का कार्य भी रविवार को पूरा हो गया है।

कल सोमवार को भगवान विश्वनाथ मंदिर की नव निर्मित छतरी को मंदिर के शीर्ष पर चढ़ाने के बाद कलश को भी शीर्ष पर स्थापित कर दिया जायेगा। इसके साथ ही पूर्व में विश्वनाथ मंदिर में अवस्थित भैरव मंदिर का पुनर्निर्माण भी शुरू किया जाएगा। भैरव मंदिर कुछ वर्ष पूर्व क्षतिग्रस्त हो गया था। स्थानीय जनता द्वारा लंबे समय से इसके पुनर्निर्माण की मांग कर रहे थे। इस पर बीकटीसी अध्यक्ष ने भैरव मंदिर के पुनर्निर्माण की घोषणा की थी।

दिल्ली के एक दानीदाता दिनेश कानोड़िया के सहयोग से विश्वनाथ मंदिर की छतरी जीर्णोद्धार का कार्य संपन्न हुआ है। छतरी को पौराणिक स्वरूप के ही अनुसार डिजाईन किया गया है। कल छतरी एवं कलश स्थापित करने के अवसर पर मंदिर समिति के उपाध्यक्ष किशोर पांवर, मंदिर समिति के अधिकारी कर्मचारी, आचार्यगण एवं हकहकूकधारी मौजूद रहेंगे।

यहां उल्लेखनीय है कि बीकेटीसी अध्यक्ष अजेंद्र द्वारा लगातार मंदिरों के जीर्णोद्धार, पुनर्निर्माण, विस्तारीकरण व सौंदर्यीकरण के कार्यों को प्राथमिकता के साथ कराया जा रहा है। केदारनाथ धाम में आपदा में पूरी तरह से ध्वस्त हो चुके इशानेश्वर मंदिर को बीकेटीसी अध्यक्ष ने गत वर्ष एक दानीदाता के माध्यम से लगभग डेढ़ करोड़ रुपये की धनराशि से रिकॉर्ड समय में संपन्न कराया। ऊखीमठ स्थित ओंकारेश्वर मंदिर परिसर के विस्तारीकरण व सौंदर्यीकरण और वहां स्थित पौराणिक महत्व के कोठा भवन के जीर्णोद्धार की विस्तृत परियोजना के प्रथम चरण का कार्य तेजी से गतिमान है। शिव – पार्वती के विवाह स्थल के रूप में प्रसिद्ध त्रियुगिनारायण मंदिर और जोशीमठ स्थित भगवान बासुदेव मंदिर परिसर के विकास व सौंदर्यीकरण की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट ( डीपीआर) शीघ्र ही तैयार की जाएगी।

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